Quote of the Day

Thursday, May 26, 2011

Totaram

तोताराम तोताराम , 
पड़ा देश संकट में , तुम खाते हो आम ! 

गोदामों में सड़ रहे अनाज , 
भ्रष्टों से भर रहा समाज.
महंगाई जाये निगलती राशन, 
जेबों पे कुंडली मारे प्रशासन,
त्राहि त्राहि मचा कोहराम, तोताराम ,
पड़ा देश संकट में , तुम खाते हो आम !

रोज़ हो रहे दुराचार,
से भरा पड़ा समाचार,
तुम्हें नज़र आए ये खेल, 
और खेलों का हाल है बेमेल,
न चैन बचा ना मिले इनाम, तोताराम,
पड़ा देश संकट में , तुम खाते हो आम !

खतरे में देश की संप्रभुता, 
खंडित हो रही अखंडता ,
मीनार-ए-पाक औ चीनी दीवार, 
के बीच पनपती नक्सलिता .
ऐसे खतरों के रहते भी कैसे बैठे हो निष्काम,तोताराम,
पड़ा देश संकट में, तुम खाते हो आम!

फूट डालो और राज करो, 
अब इस नीति से तुम बाज आओ,
गरीबी न पूछे जाती पाती वेद-क़ुरान,  
अब तो तुम ये जान जाओ.
खुद तो मस्त त्योहारों इफ्तारों में उड़ाते हो मीट व जाम, तोताराम,
पड़ा देश संकट में , तुम खाते हो आम !

श्श्श्श... सुना है तुम्हारा भी विदेशों में है बैंक अकाउंट ,
अपनों को बेचीं है तुमने भी ज़मीनें ओउन डिस्काउंट ,
लेकर नाम, जनता का करेंगे बेड़ा पार, 
हर गली नुक्कड़ पर, तुमने खोले दिए हैं बार,
अब और कितना लूटोगे आवाम, तोताराम,
पड़ा देश संकट में , तुम खाते हो आम !

कहने को जनतांत्रिक देश, 
पूछे कौन जनता का क्लेष,
हर शाख पर उल्लू बैठा, 
धारे है तुम्हारा भेष .
कब तक खाओगे तुम हराम, तोताराम,
पड़ा देश संकट में , तुम खाते हो आम !

खेतों में उग रहे कांक्रिट के जंगल,
सोम या बुद्ध, रहता तुम्हारा मंगल ,
होड़ मची हुक्मरानों में, भ्रष्टाचार का दंगल,
पर जान लो एक दिन टूट पड़ेगा, सब्र का भाकड़ा-नंगल,
फिर तुम दर दर कहते फिरोगे, यह नहीं सभ्यों का काम, तोताराम,
पड़ा देश संकट में, तुम खाते हो आम !

disclaimer : the poem has nothing to do with parrots. Any parrot getting hurt by reading this poem, may ask me for my personal apology to it.


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3 comments:

Shiv said...

बढ़िया कविता.
सारे सवाल सही हैं. जवाब आये तो पता चले.

JAZBAAT said...

behtareen vyanga aur ktaakch poorn kavita...really awsome poem on currupt politcs and indian Laachaari...
nice picturization of TOTARAAM

Anonymous said...

There is James Clive's poem about Parrot

I was feeding my parrot today
And I looked him in the eye
What is his purpose just sitting in a cage
He doesnt know anything about the world today
War
Famine
It must be great being a parrot..


Your Totaram is much more aware about daily happenings than James Clive's parrot..He can replace CBI sleuths in Anti-corruption drive because he knows everything..Mr Totaram's voice is full of sarcasm and voyeurism..Please keep him in his duty..